Tuesday, November 28, 2006

वो रात

अंधेरे रात मे चमकते जुगनू को देखा
ऐसा लगा मानो कवि की
सुन्दर कल्पना हो
छोटी सी परी की सुन्दर सी
उडान हो
मेरी बेटी की प्यारी मुस्कान
सी लगी वो रात

** रचना सागर **
रचना तिथी : २७.११.२००६

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